Ayodhya: अयोध्या जा रहे हैं – तो राम मंदिर के बाद इन 7 जगहों पर जरूर घूमने जाएं।

This photo is about Ram Mandir and Ayodhya.

मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम की नगरी अयोध्या धार्मिकता के साथ-साथ पर्यटन की दृष्टि से भी विश्व के मानचित्र पर स्थापित हो रही है। एक ओर प्रभु राम अपने भव्य महल में विराजमान होकर दिव्य दर्शन प्रदान कर रहे हैं, वहीं लाखों के संख्या में श्रद्धालु धर्म नगरी अयोध्या पहुंच रहे हैं। यदि आप भी अयोध्या का योजना बना रहे हैं और राम मंदिर के अलावा अयोध्या में और स्थानों पर घूमना चाहते हैं, तो यह समाचार आपके लिए महत्वपूर्ण है।

सरयू तट पर बसी प्रभु राम की नगरी अयोध्या मठ-मंदिरों की वजह से पूरे विश्व में प्रसिद्ध है. हर राम भक्त आया है, अयोध्या जाने का इच्छुक है, और अपने आराध्य प्रभु श्री राम का दर्शन करना चाहता है. प्रभु राम के भव्य महल में विराजमान होने के बाद, राम भक्तों का संग्रह अयोध्या में हो रहा है. 23 जनवरी को राम मंदिर के प्रांगण में पट खोले गए थे. 23 जनवरी को 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, और 24 जनवरी को भी बड़ी संख्या में भक्तों का समर्थन देखा गया, जो रामलला के दर्शन करने के लिए आए थे. धार्मिकता के साथ-साथ, पर्यटन की दृष्टि से भी, प्रभु राम की नगरी अयोध्या विश्व मानचित्र पर महत्त्वपूर्ण स्थान पर है. रामलला के दर्शन पूजन करने के बाद, आप अपने परिवार के साथ आनंदित समय बिताने के लिए अयोध्या में कई अन्य स्थानों का भी आनंद ले सकते हैं

आर्थिक एवं पर्यटन को बढ़ावा:

राम मंदिर के निर्माण का असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी हो रहा है। इसने आयोध्या को पर्यटन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना दिया है, जिससे स्थानीय विकास में वृद्धि हुई है।

सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व:

आयोध्या भारतीय सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। यहां स्थित राम जन्मभूमि हिन्दू समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो उनके आदर्शों और धरोहर का प्रतीक है।

सार्वजनिक उत्सव:

राम मंदिर के पूर्ण होने पर देशव्यापी प्रतिक्रिया और उत्सवों ने एक साथ देखा। इससे उत्साह और आनंद का वातावरण बना रहा, जो सभी वर्गों में महसूस हुआ।

  • हनुमानगढ़ी
  • कनक भवन
  • दशरथ महल
  • नागेश्वर नाथ मंदिर
  • सूर्य कुंड
  • राम की पैड़ी
  • सरयू तट
  • गुप्तार घाट

हनुमानगढ़ी : 

हनुमानगढ़ी मंदिर, अयोध्या का प्राचीन और सिद्ध पीठ, एक विशेष स्थान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां भगवान राम ने अपने प्रिय भक्त हनुमान को अपने साथ रहने का आदान-प्रदान किया था, जब वे लंका से लौटे। इसके कारण इस स्थान को ‘हनुमानजी का घर’ भी कहा जाता है। अथर्ववेद के अनुसार, भगवान राम ने हनुमानजी से कहा था कि जब भी कोई अयोध्या आए, वह पहले हनुमानजी के दर्शन करें। इसलिए आज भी लोग रामलला के दर्शन से पहले हनुमानगढ़ी पहुंचते हैं।

दशरथमहल : 

दशरथ महल, एक प्राचीन और त्रेता युगीन स्थल है, जहां राजा दशरथ निवास करते थे। यहां पर मान्यता है कि प्रभु राम ने अपना अधिकांश बचपन व्यतीत किया था। वर्तमान में, यह स्थान एक प्रसिद्ध सिद्धपीठ बन चुका है, जहां राजा दशरथ और उनकी पत्नियों के साथ लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न की मूर्तियां स्थित हैं। यहां श्रद्धालु एक साथ आकर अयोध्या में पूरे राज परिवार की पूजा-अर्चना करते हैं।

कनकभवन : 

कनक भवन: यह कहा जाता है कि रानी कैकेयी ने कनक भवन को माता सीता के मुख को देखने का अवसर प्रदान किया था। बाद में कई बार इस मंदिर का निर्माण हुआ। वर्तमान मंदिर 1891 में ओरक्षा की रानी के द्वारा बनवाया गया है। अयोध्या आने वाले श्रद्धालु हनुमानगढ़ी, श्रीरामजन्मभूमि के साथ कनक भवन अवश्य जाते हैं।

नागेश्वरनाथमंदिर :

 भगवान राम के पुत्र कुश द्वारा स्थापित नागेश्वर नाथ मंदिर राम की पैड़ी पर स्थित है, जहां सावन माह और शिवरात्रि के दिनों में लाखों भक्तगण भक्ति के सागर में डूबते हैं।

सूर्य कुंड :

 जब प्रभु राम ने लंका पर विजय प्राप्त की और अयोध्या लौटे, तो अयोध्यावासी समेत सभी देवी-देवताएं उनका हार्दिक स्वागत किया। कहा जाता है कि उस समय भगवान सूर्य भी एक महीने तक अयोध्या में ठहरे रहे थे। सूर्यकुंड दर्शन नगर में स्थित है और इसे आधुनिक सुविधाओं से सजाया गया है। प्रतिदिन यहां पर प्रभु राम की कथा पर लेजर शो भी होता है। परिवार के साथ आप इस लेजर शो का आनंद ले सकते हैं और पार्क में बैठकर आनंद उठा सकते हैं।

राम की पैड़ी : 

अयोध्या की हृदय स्थली, जहां राम की पैड़ी स्वयं में एक पिकनिक स्पॉट बन रही है, वहां सबसे लंबे पर्दे पर लेजर शो का आयोजन होता है, जिसमें भगवान राम की कथा प्रदर्शित होती है। इसी स्थान पर भव्य दीपोत्सव भी मनाया जाता है। राम की पैड़ी के बीच में माता सरयू का आचामन भी अनेक श्रद्धालुओं द्वारा किया जाता है।

सरयूतट : 

सरयू तट पर लगभग सभी देशों से एक बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिभासित होती है। धार्मिक विश्वास है कि सरयू तट में स्नान करने से व्यक्ति सभी पापों से मुक्त हो जाता है। यहां तक ​​कि तीर्थ राजा प्रयाग के निवासी भी अपने पापों को धोने के लिए अयोध्या आते हैं।

गुप्तारघाट :

 यह स्थान एक ऐसा घाट है, जहां भगवान श्रीराम ने अपनी जलसमाधि ली थीं। सरयू नदी के किनारे स्थित गुप्तार घाट पर अनेक छोटे-छोटे मन्दिर हैं, जिनके साथ यहां का सुंदर दृश्य देखकर मन को आनंद आता है। इस स्थान पर आकर मुक्ति प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं। 19वीं सदी में राजा दर्शन सिंह ने गुप्तार घाट को पुनः निर्माण कराया था। इस घाट पर राम जानकी मंदिर, पुराने चरण पादुका मंदिर, नरसिंह मंदिर, और हनुमान मंदिर हैं, जो लोगों की श्रद्धा का केंद्र बने हुए हैं।

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