मोदी सरकार का बड़ा फैसला – मालदीव को ₹170 करोड़ की सहायता में कटौती, बढ़ाई गई श्रीलंका की आर्थिक समर्थन राशि

मोदी सरकार का बड़ा फैसला - मालदीव को ₹170 करोड़ की सहायता में कटौती, बढ़ाई गई श्रीलंका की आर्थिक समर्थन राशि

मालदीव की बयानबाजी:

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की सरकार ने भारत विरोधी बयानों के कारण अब भारत से मिलने वाली सहायता में तगड़ा नुकसान झेलना जरुरी कर दिया है। भारत ने मालदीव को पहले दी जाने वाली आर्थिक सहायता को कम कर दिया है, जिसका घोषणा अंतरिम बजट 2024-25 में की गई है। इसी समय, नेपाल और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों को मदद में और वृद्धि हुई है।

मालदीव की सहायता राशि में की गई कमी:

वित्त मंत्रालय ने बजट 2024-25 के दौरान भारत द्वारा मित्र देशों को प्रदान की जाने वाली सहायता की जानकारी साझा की है। इस अनुसार, भारत सरकार ने 2024-25 में मालदीव को ₹600 करोड़ की सहायता देने का ऐलान किया है। इस वर्ष, मोदी सरकार ने मालदीव को पहले दी जाने वाली सहायता को 22% कम कर दिया है।

पिछले वित्त वर्ष 2023-24 में, मालदीव को ₹770 करोड़ की सहायता प्रदान की गई थी। इस बार के बजट में मालदीव को ₹600 करोड़ की सहायता देने का निर्णय लिया गया है। पहले, सरकार ने लगातार मालदीव को मदद में बढ़ावा दिया था, लेकिन इस बार तीन वर्षों के बाद पहली बार हुआ है कि मालदीव को सहायता में कमी कर दी गई है।

मोदी सरकार का बड़ा फैसला -  मालदीव को ₹170 करोड़ की सहायता में कटौती, बढ़ाई गई श्रीलंका की आर्थिक समर्थन राशि

मालदीव की आर्थिक सहायता :

2022-23 के मुकाबले, 2023-24 में मालदीव को पहले दी जाने वाली आर्थिक सहायता ने चौगुना वृद्धि की गई है। जब 2022-23 में मालदीव को ₹183 करोड़ की मदद मिली थी, तो इसे 2023-24 में ₹770 करोड़ तक बढ़ा दिया गया है। हालांकि, सरकार ने अब इस मदद में कमी करने का निर्णय लिया है, जिसके पीछे मालदीव की नई नवेली सरकार के भारत विरोधी दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण कारण है।

और पढ़े: Lakhpati Didi : क्या हैं लखपति दीदी योजना, और महिलाओं को कैसे मिलेगा इससे लाभ

मालदीव का भारत विरोधी रवैया:

हाल ही में मालदीव के नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने अपने भारत विरोधी रवैये के कारण सुर्खियों में रहे हैं। उनकी सरकार के मंत्री ने हाल ही में भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की हैं, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव उत्पन्न हुआ। मोहम्मद मुइज्जू ने स्वयं भी भारत विरोधी भावनाओं को बढ़ावा देने का प्रयास किया है, और उन्होंने हाल ही में भारतीय सैनिकों को 15 मार्च तक वापस जाने की मांग की थी।

चीन दौरे पर राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू:

8 जनवरी 2024 को, मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने अपने पाँच-दिवसीय चीन यात्रा की शुरुआत की, जिससे वह मालदीव के राष्ट्रपति बने पहले व्यक्ति बन गए थे।

इस दौरे से पहले, किसी भी मालदीवी राष्ट्रपति ने भारत में आधिकारिक दौरा नहीं किया था, लेकिन मुइज़्ज़ू ने पहले तुर्की और सऊदी अरब का सफर किया, और फिर चीन में अपना पहला आधिकारिक दौरा किया।

चीन से लौटने के बाद, मुइज़्ज़ू ने एक बड़ी बात कही – ‘हम छोटे देश हैं, इसलिए हमें उन्हें धौंसने का कोई अधिकार नहीं है।’

इसके बाद, मालदीव ने भारतीय सैनिकों को देश छोड़ने के लिए 15 मार्च तक का अंतिम समय दिया। यह सब घटित हो रहा था, जब मुइज़्ज़ू सरकार के मंत्रियों ने जनवरी में प्रधानमंत्री मोदी की लक्षद्वीप की तस्वीरों पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।

जयशंकर ने क्या कहा:

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, विदेश मंत्री जयशंकर ने यह बताया कि ‘चीन का भारत पर पड़ा प्रभाव तो होगा, लेकिन हमें ऐसी प्रतिस्पर्धी राजनीति के सामने डरने की आवश्यकता नहीं है। सभी पड़ोसियों के बीच कठिनाईयां आती हैं, लेकिन अंत में पड़ोसियों की आवश्यकता होती है।’

जयशंकर ने कहा कि चीन के प्रभाव के साथ हमारा प्रतिस्पर्धा बढ़ा है, लेकिन इसे भारतीय कूटनीति की हानि मानना ग़लत है।

उन्होंने कहा, ‘हमें समझना होगा कि चीन भी हमारा एक पड़ोसी है और इन देशों को प्रतिस्पर्धी राजनीति के रूप में प्रभावित करेगा। मुझे यह नहीं लगता कि हमें चीन से डरना चाहिए। मेरा मानना है कि हमें कहना चाहिए- ठीक है, वैश्विक राजनीति एक प्रतिस्पर्धी खेल है। हम अपनी सर्वश्रेष्ठ कोशिश करेंगे, वे अपनी सर्वश्रेष्ठ कोशिश करेंगे।’ जयशंकर ने और कहा, ‘आज के समय में हमें प्रतिस्पर्धा से डरना नहीं चाहिए। हमें इसे स्वीकार करना चाहिए और कहना चाहिए कि हमारे पास प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *