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भारत में मरे हुए लोगों के आधार कार्ड – पैन कार्ड पर रह रहे हैं रोहिंग्या मुस्लिम

भारत में मरे हुए लोगों के आधार कार्ड पैन कार्ड पर रह रहे हैं रोहिंग्या मुस्लिम

आधार कार्ड: बांग्लादेश और म्यांमार से अवैध रूप से भारत में प्रवेश कर रहे रोहिंग्या मुस्लिम और बांगलादेशी मुस्लिम अब देश के लिए एक गंभीर समस्या बन रहे हैं। इन लोगों ने सिर्फ अवैध तरीके से देश में प्रवेश किया ही नहीं है, बल्कि उन्होंने खुद को यहाँ के नागरिक के रूप में पेश करने के लिए नकली आधार और वोटर कार्ड जैसे दस्तावेज भी बनाए हैं। इन्हें अब मृत व्यक्तियों के आधार और वोटर कार्ड जैसे दस्तावेजों को अपने नाम पर हस्तांतरित करने का आरोप भी लगाया जा रहा है।

ये अवैध प्रवासी विभिन्न भारतीय राज्यों में छुपे हैं और अपनी पहचान छिपाने के लिए ऐसे लोगों के पहचान पत्र का दुरुपयोग कर रहे हैं, जिनकी मौत हो चुकी है। इन नामों के साथ, वे अपने कारोबार को चला रहे हैं और बैंकों में खाते खोलवा रहे हैं। इस तरह के मामलों के बाद, खुफिया एजेंसियाँ भी सतर्क हो गई हैं।

हाल ही में, राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) सहित भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को इस तरह के कई सबूत मिले हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इन अवैध प्रवासियों द्वारा भारत में अलग-अलग राज्यों में बसाए जाने वाले गिरोह का पता चला है। कई बांगलादेशी और रोहिंग्या मुस्लिमों को राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से गिरफ्तार किया गया है।

NIA ने तमिलनाडु में तीन व्यक्तियों को पकड़ा था।

NIA ने तमिलनाडु से तीन व्यक्तियों को हिरासत में लेने का निर्णय किया था। सूत्रों के अनुसार, NIA ने मोहम्मद सोरीफुल बाबू मियां, शहाबुद्दीन हुसैन, और मुन्ना जिन्हें नूर करीम नाम से जाना जाता है, को तमिलनाडु में मानव तस्करी गिरोह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किया था। ये तीनों व्यक्ति लंबे समय से मानव तस्करी गिरोह के साथ जुड़े हुए थे और उन्होंने बांग्लादेश से भारत लाए गए रोहिंग्या मुसलमानों के लिए नकली पहचान से संबंधित दस्तावेज बनाए थे।

सूत्रों के अनुसार, इन गिरफ्तारियों ने जांच एजेंसियों को बताया है कि वे मृत व्यक्तियों के दस्तावेजों का दुरुपयोग करके रोहिंग्या मुसलमानों को भारतीय पहचान देने का काम करते थे। NIA ने इन लोगों से जुड़े बहुत से आरोपों का भी डेटा प्राप्त किया है, और इस डेटा की जांच और अन्य घुसपैठियों की पहचान के लिए कठिनाईयों का सामना किया जा रहा है।

साथ ही, NIA ने कई अन्य जांच एजेंसियों की मदद से इन गिरफ्तारियों के फर्जी पतों की जाँच करना शुरू किया है, और इन ठिकानों की पहचान करके उन्हें लाए जा रहे रोहिंग्या घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। NIA को तमिलनाडु, हरियाणा, असम, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, और कई अन्य राज्यों में रोहिंग्या घुसपैठियों के बारे में जानकारी मिली है।

विदेशी फंडिंग 

हाल ही में, उत्तर प्रदेश एटीएस ने विदेशी निधियों की सहायता से अवैध घुसपैठियों के साथ मिलकर कुछ लोगों को पकड़ा। कानपुर से गिरोह के सक्रिय सदस्यों और बांग्लादेश निवासी मोहम्मद राशिद अहमद ने जांच में बताया कि उन्होंने पाँच अन्य बांग्लादेशी व्यक्तियों को फर्जी दस्तावेजों की मदद करके उनकी पहचान बदलकर देवबंद में ठिकाना दिलाया था।

पहले ही पकड़े गए बांग्लादेशी आदिलुर्रहमान को भी फर्जी दस्तावेज राशिद ने ही प्रदान किए थे। एटीएस ने हाल ही में विदेशी निधियों के मास्टरमाइंड और एनजीओ संचालन करने वाले अबू सालेह मंडल को लखनऊ से पकड़ा है। वह अपने एनजीओ में विदेशी निधियों को जुटा कर भारत में अवैध घुसपैठियों को स्थानांतरित करने में सहायता करता था।

रोहिंग्याओं के नकली दस्तावेज बनाने का यह तरीका

एनआईए द्वारा पकड़ा गया शहाबुद्दीन हुसैन सरकारी अधिकारियों से मिलकर मृत लोगों का डेटा हासिल करने का अनूठा तरीका अपनाता था। उनकी उम्र, आधार नंबर, और अन्य विवरण का इस्तेमाल करके वह बाबू मियां और मुन्ना जैसे उम्र में मिलते-जुलते घुसपैठियों के डेटा को अपडेट करते थे। डेटा अपडेट होने के बाद, वे आधार कार्ड का इस्तेमाल करके राशन कार्ड, पैन कार्ड, और अन्य दस्तावेज तैयार कराते थे।

NIA ने की कार्रवाई 

अबू सालेह ने ATS को बताया कि उन्होंने हरोआ-अल जमियातुल इस्लामिया दारूल उलूम मदरसा और कबीरबाग मिल्लत एकेडमी नामक दो ट्रस्टों की संचालन की थी। इन ट्रस्टों के FCRA खातों में ब्रिटेन के उम्मा वेलफेयर ट्रस्ट से साल 2018-22 तक लगभग 58 करोड़ रुपए जमा हुए थे। उम्मा ट्रस्ट को आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के कारण अमेरिका ने प्रतिबंधित किया है।

दैनिक भास्कर के सूत्रों के अनुसार, NIA ने तमिलनाडु में मोहम्मद सोरीफुल बाबू मियां, शहाबुद्दीन हुसैन, और मुन्ना उर्फ नूर करीम को गिरफ्तार किया है। ये तीनों बांग्लादेश से लाए गए रोहिंग्या मुस्लिमों के लिए फर्जी आधार कार्ड, राशन कार्ड, पैन कार्ड, मार्कशीट, आदि बनाते थे। इन गिरफ्तारों ने बताया कि वे रोहिंग्या मुस्लिमों को भारतीय पहचान देने के लिए मृतकों के दस्तावेज़ का इस्तेमाल करते हैं। NIA ने इन लोगों की सूची मिली है और इस पर जाँच कर रही है, ताकि फर्जी दस्तावेज़ और गुप्त आतंकी गतिविधियों की पहचान की जा सके। NIA की जाँच से तमिलनाडु, हरियाणा, असम, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, और जम्मू जैसे कई राज्यों में रोहिंग्या घुसपैठियों की जानकारी मिली है।

आधार कार्ड फर्जीवाड़े को देखते हुए सरकार ने बनाए कड़े नियम

इन सभी फर्जीवाड़ों की पहचान करते हुए सरकार ने अक्टूबर 2023 से जन्म और मृत्यु प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य बना दिया है। अब, मृत्यु प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए मृतक को अपना आधार कार्ड प्रदान करना होगा। इसके बाद, संबंधित अधिकारी उस आधार कार्ड की जानकारी UADAI को भेजेंगे। उसके बाद, UADAI मृतक का आधार निष्क्रिय कर देगा और उसका नाम सभी स्थानों से हटा दिया जाएगा।

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